राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए कुछ राहत देने वाला रहा बजट

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लखनऊ, जेएनएन। मोदी सरकार के आखिरी बजट को भले ही विभिन्न वर्गों के लिहाज से अपेक्षाओं की कसौटी पर कसा जा रहा हो लेकिन, राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और अन्य वेतनभोगी तबके को पहली नजर में यह बजट भा गया है। पांच लाख रुपये तक आमदनी पर आयकर से छूट और ग्रेच्युटी की बढ़ी लिमिट उन्हें आकर्षित कर रही है।
सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र इस बजट को कर्मचारियों के लिए हितकारी ठहराते हैं। वह कहते हैैं कि निचले स्तर के कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक आमदनी पर आयकर छूट से बड़ी राहत मिलेगी, जबकि ग्रेच्युटी की लिमिट 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किए जाने से भी कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। हालांकि पांच लाख रुपये से अधिक आय वालों के लिए आयकर छूट की सीमा पहले जैसी रहने से कर्मचारियों में निराशा भी है लेकिन, सरकारी क्षेत्र में कम वेतन पर कार्यरत संविदाकर्मियों और निजी क्षेत्र में अल्प वेतन पाने वालों को आयकर की इस छूट से सुकून मिलेगा।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैैं कि आयकर छूट की व्यवस्था से निचले स्तर के करीब पांच-छह लाख कर्मचारियों को फायदा होगा लेकिन, बजट में पुरानी पेंशन बहाली की बात भी की जानी चाहिए थी। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने आयकर की टैक्स दरों में बदलाव न होने को कर्मचारियों के साथ धोखा करार देते हुए बजट 2020 को निराशाजनक बताया है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने आयकर की धारा 80-सीसी के तहत बचत की डेढ़ लाख रुपये की सीमा में कोई बढ़ोतरी न किए जाने और बजट में पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा न किए जाने को अन्यायपूर्ण करार दिया है। 
दुबे ने कहा कि आयकर छूट की सीमा आठ लाख रुपये और 80-सीसी के तहत बचत की सीमा बढ़ाकर कम से कम तीन लाख रुपये की जानी चाहिए थी। इसी तरह सेवानिवृत्त कार्मिकों को उम्मीद थी कि उनकी पेंशन पूरी तरह करमुक्त की जाएगी लेकिन, वरिष्ठ नागरिकों को भी कोई राहत नहीं दी गई है। दूसरी तरफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी बजट को ऊर्जा क्षेत्र के लिए निराशाजनक बताया है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि गरीबों के लिए बिजली सस्ती की जानी चाहिए थी और बिजली कंपनियों के बढ़ते घाटे पर भी चिंता की जानी चाहिए थी।

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